यदि आप अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन एक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश से दूसरे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में ट्रांसफर करने की योजना बना रहे हैं, तो यह प्रक्रिया आपकी अपेक्षा से कहीं अधिक सरल हो सकती है. केंद्र सरकार ऐसे ट्रांसफर के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की आवश्यकता को समाप्त करने पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है. इससे पूरी प्रक्रिया कम जटिल, तेज और अधिक किफायती हो जाएगी.
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एक रिपोर्ट के अनुसार, नीति आयोग द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने अंतर-राज्यीय वाहन ट्रांसफर को सरल बनाने के लिए एक नई स्वतः-जनित मंजूरी प्रणाली की सिफारिश की है. वर्तमान में, वाहन के मालिक को उस क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होता है जहां वाहन पंजीकृत है और उसे उस नए आरटीओ में जमा करना होता है जिसके अधिकार क्षेत्र में वाहन का ट्रांसफर होना है. यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि ट्रांसफर से पहले सभी पेंडिंग चालान या अन्य बकाया राशि का भुगतान हो जाए.
समिति का मानना था कि परिवहन पोर्टल अब देश भर के अधिकांश आरटीओ को जोड़ता है और वाहन रिकॉर्ड वाहन डेटाबेस में डिजिटल रूप से संग्रहीत किए जा रहे हैं, जिससे अंततः फिजिकल NOC प्राप्त करने की आवश्यकता कम हो जाएगी. यह प्रस्ताव अब केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के दायरे में है और निकट भविष्य में इसे लागू होते देखा जा सकता है.
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